शिक्षा लोन कैसे ले पूरी जानकारी : Education loan kaise lete hai - Education loan kaise milta hai 100%

 

शिक्षा लोन  कैसे ले : Education loan kaise lete hai - Education loan kaise milega

education loan kaise lete hai


        टॉपिक कवर्ड :

✔ Education loan kaise milta hai  
✔ Education loan kaise lete hai
✔ Education loan kya hai 
✔ Education loan me kya kya cover hota hai
✔ Education loan ke liye kaun kaun apply kar sakte hai  
✔ Education loan ke liye eligibilty criteria 
✔ Education loan ke types 
✔ Education loan ke fayde 
✔ Interest Rate and Repayment 
✔ Education Loan FAQs 
 


शिक्षा लोन कैसे मिलेगा ? (Eduction Loan Kaise milta hai )

आसान परिभाषा में कहे तो शिक्षा लोन  (Education Loan) वह लोन  होता है जो शिक्षा (education) के लिए लिया जाता है| हज़ारों-लाखों छात्रों का यह सपना होता है कि वह एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय (college) या संस्था (institute) से अपनी पढ़ाई पूरी करें | बहुत से छात्र-छात्राएँ जो बचपन से ही अपने लक्ष्य के लिए निर्धारित रास्ते पर चलते हैं वह अपने योजना (plan) में यह भी शामिल करते हैं की आगे चलकर उन्हें किस विश्वविद्यालय में दाखिला (admission) लेना है या किस विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करनी है

जिन छात्रों (students) को शुरुआत से ही पढ़ाई में दिलचस्पी होती है उनके मन यह ख्याल तो ज़रूर आता होगा की वह भी शीर्ष(top) संस्थाओं से उत्तीर्ण (pass) हो क्योंकि टॉप college से पास होने पर आपको/आपके किसी अच्छी कंपनी या कोई फर्म (firm) में रोजगार (job) मिलने की संभावना ज़्यादातर बढ़ जाती हैइसलिए ज़्यादातर बच्चों की कोशिश यही रहती है की उनका एक महान, अच्छे संस्था में दाखिला हो जाए

हमारे भारत देश में शिक्षा को लेकर बहुत से माता-पिता अपने बच्चों के प्रति बहुत ही संजीदा (serious) होते हैं, हर माता-पिता यही सोचते है की उनका बच्चा अच्छे से पढ़-लिखकर कुछ बने उनका नाम रोशन करें क्योंकि हमारे देश में शिक्षा को एक अलग ही ओदा, नजरिया दिया जाता है, सोसाइटी (society) में उस पढ़े-लिखे व्यक्ति की अलग इज्ज़त  होती है, उसको सम्मान दिया जाता है| मेरे नज़रिए में parents अपने बच्चों को जितना पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित (encourage) करते हैं शायद ही और किसी के लिए करते हों | हर माता-पिता (parents) की यही इच्छा होती है की उनका बेटा या बेटी अपनी ज़िन्दगी में सफल हो जाए, कामयाबी प्राप्त करले इतना काबिल हो जाए की वह अपनी आगे की ज़िन्दगी खुद तय कर सके और यह सब उनको लगता है की वह शिक्षा और अपनी समझदारी से प्राप्त कर सकते हैं

लेकिन हर छात्र की किस्मत इतनी अच्छी या मेहरबान नहीं होती की वह भी इन शीर्ष विश्वविद्यालयों में पढ़ सकें इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे की बारहवीं या ग्रेजुएशन की परीक्षाओं में अच्छे अंक आना, बहुत से college छात्रों के एडमिशन के लिए साक्षात्कार (interview) भी कंडक्ट करते है जो की हर बच्चा पास नहीं कर पाता, कई बार हम कॉलेज की पात्रता मापदंड (eligibility criteria) को meet नहीं कर पाते, बहुत सी बार ऐसा भी होता की हमारे पास पूरे दस्तावेज़ नहीं होते जो की दाखिले के लिए ज़रूरी होते हैं जिस वजह से भी कई बार बहुत से छात्रों का दाखिला रुक जाते है, नहीं हो पाता है |  

लेकिन इन सभी कारणों में से जो सबसे महत्वपूर्ण कारण होता हैं , जो सबसे ज़रूरी सवाल को जन्म देता  है कि क्या हम इन टॉप के कॉलेज (colleges, universities), की फीस का खर्चा उठा सकते हैं ? क्या हम इन संस्थाओं की पढ़ाई के खर्चों को afford कर सकते हैं ? मेरे मानने में तो बहुत से छात्रों का जवाब में होगा

हमारे देश में बहुत से छात्र ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, जिनके माता-पिताओं की आमदनी / आय इतनी नहीं हो पाती की वह इन बड़े-बड़े college की फीस भर सकें | वह चाह कर भी इन universities को afford नहीं कर पाते हैं इनका खर्चा नहीं उठा पाते | तो इन परिस्थितिओं के कारण हम अपने सपनों को तो नहीं मार सकते .... तो ऐसी स्थिति में हम अपनी पढ़ाई के लिए या तो हम अपने किसी जानकार से पैसे उधार लेते हैं या फिर लेते है लोन  | दूसरा विकल्प के तौर पर हमारे दिमाग में लोन  ही आता है, किसी-किसी के लिए यह पहला विकल्प भी हो सकता है|

 तो इस दुविधा में छात्र के पास एक बहुत ही अच्छा विकल्प होता है और वह है education लोन  ले सकता है  जो लगभग हर बैंक प्रदान करता है| छात्र (students) इस लोन  को लेकर अपने सपनों पर लगे ताले को खोल सकते है | लेकिन छात्र यह ध्यान रखें की शिक्षा लोन  लेने पर पैसों के साथ-साथ आपके कन्धों पर एक बहुत ही बड़ी ज़िम्मेदारी भी जाती है, की एक समय बाद आपको यह लोन  चुकाना भी होता है | तो इस लेख (article) में हम आपको शिक्षा लोन  से जुड़ी जानकारी प्रदान करने की कोशिश करेंगे, की शिक्षा लोन  होता क्या है ? किन छात्रों  को यह लोन  मिल सकता है ? शिक्षा लोन  आवेदन  करने के लिए क्या eligibility होनी चाहिए ? शिक्षा लोन  के लिए क्या-क्या ज़रूरी दस्तावेज़ चाहिए ......इत्यादि तो जानते शिक्षा लोन  के बारे में |  

 

शिक्षा लोन  क्या है? ( Education Loan Kya Hai )

आसान परिभाषा में कहे तो शिक्षा लोन  (Education Loan) वह लोन  होता है जो शिक्षा (education) के लिए लिया जाता है|

जैसा की आप सभी यह जानते हैं की शिक्षा लोन  का अर्थ है कि वह धन जो आप किसी वित्तीय संस्थान या किसी बैंक से उधार लेते हो आप अपनी शिक्षा, पढ़ाई के लिए इस्तेमाल करते हैं | एक तरह से बैंक, धन राशि के तौर पर आपको एक क़र्ज़ देता है ताकि उस राशि का इस्तेमाल करते हुए आप अपनी  ग्रेजुएशन , पोस्ट-ग्रेजुएशन और हायर स्टडीज के खर्चों को वित्त कर सको , आपकी शिक्षा में आने वाले सभी खर्चों को उठा सको | इतनी सहूलियत बैंक आपको प्रदान करता है |

 

 

शिक्षा लोन  में क्या-क्या सुविधा या कह सकते है क्या-क्या खर्चे आवरण (cover) होते है ?

         कोर्स की पूरी फीस (शुल्क) 

         ट्यूशन फीस 

        परीक्षा फीस (examination fee)/पुस्तकालय (library)/प्रयोगशाला (laboratory)

        यात्रा के खर्चे (travel expenses)

         विदेश में पढ़ाई के खर्चे (abroad study expenses)

         रहना का खर्चा (living expenses)

         किताबें/वर्दी (uniform)/कोई उपकरण(instruments/equipment) [इन सब का कुल खर्चा कुल लोन  के 20% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए ]

         अगर आपके कोर्स में लैपटॉप/कंप्यूटर जैसे उपकरण का इस्तेमाल करना ज़रूरी है तो आप उचित मूल्य पर इन को खरीद सकते हैं [इन सब का कुल खर्चा कुल लोन  के 20% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए ]

         कोई और तरह के खर्चे जो आपके कोर्स को पूरा करने के लिए ज़रूरी है जैसे की कोई प्रोजेक्ट का काम, अध्ययन भ्रमण (study tour), इत्यादि  [इन सब का कुल खर्चा कुल लोन  के 20% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए ]

         और भी कोई खर्चा जो आपकी शिक्षा या कोर्स के दौरान हो सकता है वह आपके शिक्षा लोन  में शामिल हो जाएगा 

 

शिक्षा लोन  (Educationa loan) के लिए कौन आवेदन (apply) कर सकता है ?

शिक्षा लोन  छात्रों के लिए होता है तो इसलिए एक छात्र लोन  का मुख्य उधार धारक होता है | इसके अलावा छात्र के माता-पिता (parents), भाई-बहन (sibling), और अन्य रिश्तेदार आदि को-एप्लिकेंट हो सकते हैं | जिन छात्रों की उम्र 18 से 30 वर्ष होती है वह लोन  के लिए आवेदन कर सकते हैं ध्यान दें हम आपको यह एक औसत उम्र बता रहें हैं क्योंकि यह बैंक या वित्तीय संस्थाओं  पर निर्भर करता है| हर बैंक का अपना-अपना एक eligibility criteria होता है जैसे कुछ बैंक 16 वर्ष के उम्र के छात्रों को लोन  प्रदान कर देते तो वहीं कुछ 17 या 18 साल की उम्र के छात्रों को देते हैं | कई बैंक 30 साल की आयु वाले छात्रों तक को लोन  प्रदान कर देते तो कहीं यही संख्या 35 भी होती है |

 

शिक्षा लोन  के लिए Eligibility criteria क्या है

·    जो भी छात्र लोन  के लिए आवेदन कर रहा है वह भारतीय नागरिक होना चाहिए,

·         किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज में छात्र का दाखिला पक्का हो गया हो

·         अगर कोई छात्र स्नातक की पढ़ाई (graduation) के लिए लोन  का आवेदन करता है तो उस छात्र की बारहवीं कक्षा(12th) पूरी होनी चाहिए,

·        यदि कोई छात्र पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई (post graduation) के लिए लोन  का आवेदन करता है तो उस छात्र की स्नातक की पढ़ाई पूरी होनी चाहिए

·        जिस भी महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में छात्र दाखिला लेना चाहता हो वह महाविद्यालय UGC/GOVT./AICTE/AIBMS/CMR etc से मान्यता प्राप्त (recognised) होना चाहिए,

·        छात्र की उम्र लोन  लेते वक़्त बैंक के eligibility criteria से मेल खानी चाहिए (लगभग 16 से लेकर 35 वर्ष होनी चाहिए),

·        RBI (रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ) के दिशा निर्देशों के मुताबिक किसी भी छात्र के upper age पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन बैंक अपने कुछ नियम खुद सेट करता है,

·        जो भी दस्तावेज़ बैंक मांगे वह सभी दस्तावेज़ आपको प्रदान करने होते हैं,

 

किसी भी छात्र के लिए शिक्षा लोन मिलने की संभावना कब ज़्यादा बढ़ जाती है ?

·         अपने संबंधित परीक्षाओं में उच्च ग्रेड स्कोर करना या उच्च रैंकिंग हासिल करना ,

·        अपना शैक्षिक (academic) अभिलेख (रिकॉर्ड) अच्छा रखना

·        छात्र के माता-पिता / अभिभावक (guardian) /co-applicant का वित्तीय पृष्ठभूमि (financial background) का मजबूत होना ,

·        किसी मान्यता प्राप्त टॉप / प्रतिष्ठित कॉलेज संस्था में दाखिला लेना ,

·        छात्र किसी टॉप के कोर्स में दाखिला लेता है तो वहाँ लोन  मिलने की संभावना बढ़ जाती जैसे

        IIMs, IITs, IISc, NID, NIFT, के द्वारा कराए गए कोर्स 

        रेगुलर डिग्री या डिप्लोमा कोर्स जैसे की aeronautical, pilot training etc

       इंजीनियरिंग कोर्स , CA , MBA मेडिकल कोर्स , होटल management, architecture कोर्स etc

       बैंक को यह यकीन दिलाना कि छात्र की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनको नौकरी किसी अच्छे क्षेत्र में मिल जाएगी और एक उत्तम तन्खुआ भी 

 

शिक्षा लोन  के प्रकार (types of education loan) 

स्थान के आधार पर 

दो तरह के शिक्षा लोन  होते हैं

1.   घरेलू शिक्षा लोन  (domestic loan)- जो छात्र अपने देश में रहकर उच्च शिक्षा करना चाहते हैं उनके लिए घरेलू शिक्षा लोन  होता है | छात्र को अपने देश में ही किसी प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त कॉलेज में दाखिला लेना होता है | छात्र को लोन  तभी मिलता है जब वह बैंक या जो लोन  दे रहा है उसके सारी eligibility criteria पूरा करें | यह लोन  abroad में जाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को नहीं मिलता है |



2.  विदेशी शिक्षा लोन  (overseas loan)- बहुत से छात्रों का यह सपना होता है की वह अपने मन पसंदीदा देश में जाकर अपनी higher शिक्षा ग्रहण /पूरी करें | तो उन सभी छात्रों के लिए विदेशी शिक्षा लोन  होता है जो उनके सपनों को पूरा करता है | यह लोन  भी उन्हीं छात्रों को मिलता है जो बैंक या उधार-दाताओं के सभी eligibility criteria को पूरा करें | लोन  के अंदर छात्रों का यात्रा का खर्चा (travel expenses), वहाँ रहने का खर्चा (living expenses), ट्यूशन फीस (tuition fee),कोर्स फीस (course fee), इत्यादि यह सभी लोन  में कवर (cover) हो जाते हैं |

 

कोर्स के आधार पर 

1.   स्नातक पाठ्यक्रम (undergraduate course) लोन  

2.  पोस्ट ग्रेजुएशन लोन  

3.  कुछ विशिष्ट कोर्स के लिए लोन  जैसे पायलट, होटल मनगेमेंट, इंजीनियरिंग आदि |  

 

Collateral के आधार पर 

1.   Collateral सिक्यूरिटी- जैसे फिक्स्ड डिपाजिट, गोल्ड, संपत्ति आदि इन सब के आधार पर भी आप लोन  के लिए आवेदन कर सकते हैं | collateral (सहायक) के आधार पर किसी भी छात्र को लोन  लेने की ज़रूरत तब पड़ती है जब आपके लोन  ज्यादा धनराशि का हो | अनुमान के मुताबिक जब आपके लोन  की रकम लगभग 7-8 लाख से ऊपर हो तब आपको collateral security की ज़रूरत पड़ती है जैसे बैंक आपसे आपकी प्रॉपर्टी, फ्लैट, गोल्ड, फिक्स्ड डिपाजिट, land, इन्सुरांस का पैसे इत्यादि इन सब के आधार पर आपको लोन  दे सकता है



2.  अगर आपके द्वारा लिए हुए लोन  की राशि लगभग 4-7.5 लाख रूपए है तो उस समय बैंक मुख्य उधार लेने वाले छात्र और co-applicant(जैसे आपके माता-पिता, भाई-बहन, चाचा, मामा या और कोई रिश्तेदार हो सकते हैं) के साथ-साथ एक थर्ड पार्टी गारंटर (guarantor) की भी मांग करता है | इतने लोन  की राशि पर आपको बैंक को कोई collateral security देने की ज़रूरत नहीं पड़ती और ही बैंक आपसे कोई security प्रदान करने की लिए बोलता है | जिसके आधार पर भी आपको शिक्षा लोन  मिल सकता है | यही भी अधिक धनराशि वाले लोन  की शैली में शामिल होता है | बैंक आपसे थर्ड पार्टी गारंटर के लिए इसलिए  बोलता है ताकि यदि भविष्य में मुख्य उधार-धारक लोन  नहीं चुकता हैं तो बैंक को यह हक़ होता है की वह लोन  लेते वक़्त दिए गए गारंटर से संपर्क करे और लोन  की राशि की repayment करने के लिए दावा या मांग कर सकता है |



3.  अगर आप 4 लाख रूपए तक लोन  लेते है तो उस केस में आपको तो कोई security जमा करनी की ज़रूरत पड़ती और ही कोई थर्ड पार्टी गारंटर की | बैंक सिर्फ मुख्य उधार लेने वाले छात्र (main borrower) के साथ co-applicant की मांग रखता है इसलिए co-applicant की लोन  लेने के समय ज़रूरत होती है |

 

शिक्षा लोन  के फायदे ( Education loan ke fayde)

  शिक्षा लोन  लेने पर सिर्फ कोई छात्र अपनी कोर्स की पूरी फीस भर सकते हैं  बल्कि अपनी  शिक्षा से जुड़ें और भी खर्चे को पूरा कर सकते हैं जैसे परीक्षा फीस, ट्यूशन फीस, किताबों का खर्चा, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, रेहना का खर्चा, यात्रा का खर्चा, आदि यह तमाम खर्चे आप अपने शिक्षा लोन  से चुका सकते हैं |



 आपको अपने savings को दस्तक नहीं देनी पड़ेगी मतलब की आपने जो भी savings भविष्य के लिए की होगी उन savings की आपको इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं होगी उसके बदले आप शिक्षा लोन  की सहायता ले सकते हैं |



 जब आप अपनी शिक्षा के लिए किसी लेंडर से शिक्षा लोन  लेते हो तो उसका आपको यह फायदा मिलता है की आपको अपने पूरे कोर्स के दौरान लिया हुआ लोन  नहीं चुकाना पड़ता फिर चाहे आपके कोर्स की अवधि 2 वर्ष हो, 3 हो, या 4 वर्ष हो | एक समय ऐसा आएगा जब आपका कोर्स पूरा हो जाएगा तब आपको बैंक से लिए हुए लोन  को वापिस करना होगा | अगर आपकी नौकरी पढ़ाई पूरी होने के बाद तुरंत लग जाती है तो आप लोन  की repayment शुरू कर सकते हैं लेकिन कई बार छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद नौकरी नहीं मिल पाती तो ऐसी स्थिति में बैंक छात्रों को 6 महीने या 1 वर्ष तक का समय और देता है ताकि छात्र को नौकरी मिल सके और लोन  के तौर पर लिया हुआ पैसा चुका सकें | किसी कोर्स की पढ़ाई शुरू होने से लेकर कोर्स खत्म होने तक और बैंक द्वारा दिए गए अतिरिक्त समय,-इन सभी को मिलाकर पूरे समय की अवधि को moratorium period कहते हैं | यहाँ पर दो केस बनते है 



1.   केस 1. – अगर छात्र चाहे तो अपने कोर्स के दौरान या moratorium period के दौरान ही, वह लोन  पर लगने वाले ब्याज (interest) की राशि को चूका सकता है |  

2.  केस 2. – अगर कोई छात्र moratorium period या कोर्स के दौरान कोई भी राशि नहीं देना चाहता तो वह अपने कोर्स पूरा होने के बाद लोन  की राशि और उस पर लगने वाले ब्याज को एक साथ बाद में रीपेमेंट के समय चुका सकता है |



 अगर आप समय पर अपने लोन  की रीपेमेंट करते हो तो आपके credit score में वृद्धि होती है जिसके बदले में आने वाले समय में अगर आपको कोई और लोन  चाहिए या लोन  के अलावा आप ऑनलाइन कोई प्रोडक्ट EMI पर खरीदते हैं तो वह मिलने में आपको आसानी हो जाती है|

 

ब्याज दर क्या होता है ? (Interest rate) 

बैंक जब किसी को लोन  प्रदान करता है तो उस लोन  पर वह ब्याज वसूलता है और यह ब्याज वह marginal cost of funds based lending rate (MCLR) और साथ में spread चार्ज का इस्तेमाल करते हुए किसी भी लोन  के लिए एक interest rate सेट करता है | spread charges लोन  लेने वाले व्यक्ति के क्रेडिट स्कोर को मध्य नज़र रखते हुए तय किया जाता है | बैंकों का MCLR अलग-अलग हो सकता है यह बैंक to बैंक पर निर्भर करता है |

 

रीपेमेंट क्या है? (Repayment) 

जो छात्र अपनी पढ़ाई के लिए बैंक से शिक्षा लोन  लेते है उनको एक समय बाद वह लोन  ब्याज के साथ चुकाना होता है, पैसे चुकाने की इस प्रक्रिया को रीपेमेंट कहते हैं| आमतौर, पर ज़्यादातर छात्र कोर्स पूरा होने के बाद ही लोन  की रीपेमेंट करते है | बहुत से बैंक छात्रों को लोन  चुकाने के लिए अतिरिक्त समय देते हैं यह उन्हीं छात्रों के लिए होता जिनकी कोर्स ख़त्म होने बाद एक साल के अंदर-अंदर नौकरी नहीं लगती है | लेकिन किसी कारण-वर्ष कोर्स खत्म होने के एक साल बाद भी किसी छात्र को नौकरी नहीं मिलती है तो फिर उस छात्र को अपनी रीपेमेंट शुरू करनी होगी फिर चाहे लोन  उस छात्र के माता-पिता (parents) पूरा करें या कहीं और से पैसों का बंदोबस्त करके लोन  की repayment पूरी करें | आमतौर पर जो लोन  का repayment समय होता है वह 5 से 7 साल के लिए होता है लेकिन यह अवधि ज़्यादा भी हो सकती है |

 

शिक्षा लोन  के लिए क्या-क्या दस्तावेज़ चाहिए होते हैं ?

शिक्षा लोन  के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

·       लोन  आवेदन फॉर्म (loan application form)

 

·      आवेदक और co-आवेदक की पासपोर्ट के आकार की तस्वीर (passport sized photographs of applicant and co-applicant)

 

·      पहचान का प्रमाण (कोई एक)[proof of identification][any one]

         पैन कार्ड 

        पासपोर्ट

        आधार कार्ड 

        वोटर आईडी कार्ड 

        ड्राइविंग लाइसेंस 

 

·  सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट(12th), मैट्रिकुलेशन स्कूल सर्टिफिकेट(10th), ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट और मार्कशीट भी 

 

· निवास प्रमाण 

·         बैंक पासबुक 

·         आधार कार्ड 

·         बिजली का बिल

·         वोटर आईडी कार्ड 

·         राशन कार्ड 

·         मान्यता प्राप्त पब्लिक authority से कोई पत्र जो यह सुनिक्षित (proof) करे की पता (address) आवेदक का ही है 

 

· हस्ताक्षर प्रमाण (signature proof)

 

·         गारंटर फॉर्म (यदि ज़रूरत पड़ती है) और उनके मूलभूत दस्तावेज़ (basic documents)

 

·        आमदनी का प्रमाण (income proof)[माता-पिता या guardian]

अगर co-applicant कहीं जॉब करते है और उनकी महीने की सैलरी आती है तब -

·         पिछले 3-6 महीने की सैलरी स्लिप 

·         पिछले 2 साल के फॉर्म 16 या IT रिटर्न्स देना होता है 

·         पिछले 6 महीने की सैलरी अकाउंट के बैंक स्टेटमेंट 

 

अगर co-applicant स्वम कमाते है (self-employed) या खुद का कोई व्यापार है तब

·         व्यापार का प्रमाण (proof of business)

 

अगर आपका व्यापार पंजीकृत है तब

    1.   व्यापार पंजीकृत दस्तावेज़ (business registration document) मुख्य प्रमाण होता है 

    2.  पिछले कुछ महीनों की बैंक स्टेटमेंट दिखानी होती है  

    3.  पिछले कुछ महीनों का ITR(income tax return) दिखाना होता है 

 

अगर आपका व्यापार पंजीकृत नहीं है तो ऐसे परिस्थिति में, तब-

     1.   GST पंजीकृत दिखाना होता है (GST registration)

     2.  परचेस बिल्स 

     3.  व्यापार से होने वाली इनकम बैंक स्टेटमेंट के द्वारा दिखानी होती है 

     4.  वित्तीय स्टेटमेंट दिखानी होती है (financial statements)



·         जिस भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में आपका दाखिला हो गया है तो वहाँ से मिले दाखिला पत्र (admission letter) आपको बैंक में दिखाना होगा 



·         और जिस भी कॉलेज में आपका दाखिला हो गया है तो आपको उस कॉलेज के शुल्क अनुसूची (fee schedule) को देना होता है, मतलब की उस कॉलेज में जिस भी कोर्स में आपने दाखिला लिया उस कोर्स की किस समय पर कब-कब कितनी फीस जमा होती है, तो यह सब शुल्क अनुसूची में शामिल होता है |



·         दाखिले के वक़्त, छात्र को खुद के पैसों से कॉलेज के मार्जिन पैसों (margin money) का भुगतान करना पड़ता है | और उसकी एक रसीद बैंक को जमा करनी होती है | मार्जिन मनी का मतलब होता है वह शुरूआती पैसे जो institute दाखिले के वक़्त लेता है |



·         अगर collateral की ज़रूरत पड़ती है तो collateral के सभी दस्तावेज़ देने होते है जैसे संपत्ति, गोल्ड, फ्लैट, फिक्स्ड डिपाजिट, इन्सुरास पालिसी (insurance policy)इत्यादि जैसी सिक्यूरिटी के दस्तावेज़ लोन  लेने वाले को बैंक में प्रदान करने होते हैं |

 

उदाहरण के लिए अगर कोई छात्र collateral security के तौर पर संपत्ति (property) का इस्तेमाल करता है तो उसके लिए ज़रूरी दस्तावेज़ नीचे दिए गए हैं 



  अचल संपत्ति (immovable properties) होनी चाहिए जैसे -कोई घर, फ्लैट, गैर कृषि भूमि (non-agricultural land),

  संपत्ति शीर्षक विलेख (property title deed) – यह एक कानूनी अभिलेख (legal record) जिससे यह पता चलता है की संपत्ति का मालिक कौन है और बीते पिछले वर्षों में उस संपत्ति का कौन-कौन मालिक रह चुका है (owner of the property),

 

  पंजीकृत बिक्री समझौता (a registered sale agreement) – जब कोई संपत्ति बिकती है तो संपत्ति बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच एक समझौता होता उस समझौते को बिक्री समझौता कहते हैं (sale agreement) तो उस समझौते की असली पंजीकृत रसीद बैंक में जमा करनी होती है,

 

  नगर निगम द्वारा आवंटन पत्र (allotment letter by municipal corporation) – यह एक तरह का पत्र होता है जिसमें कई तरह की जानकारियाँ होती है जैसे, संपत्ति कब खरीदी गई कब बेची गई, बेचने वाले ने संपत्ति कितने की बेची खरीद ने वाले ने संपत्ति कितने की खरीदी, इत्यादि जानकारियाँ | यह पत्र हर राज्य के अलग-अलग होते हैं | जैसे-

 1.महाराष्ट्र के लिए MHADA और CIDCO 

  2.हरयाणा के लिए HUDA

  3.दिल्ली के लिए DDA

  4.जयपुर के लिए JDA

  5.गुजरात के लिए GDC

 

  चैन डीड या भार-प्रमाणपत्र (chain deed or encumbrance certificate) – यह एक तरह का दस्तावेज़ होता है जो संपत्ति के पिछले 30 दिनों का कार्य निष्पादन अभिलेख बताता है (last track record),

 

  नवीनतम बिजली का बिल (latest electricity bill) या नवीनतम कर प्रति (latest tax copy),

 

  नगर पालिका द्वारा अनुमोदित भवन योजना या संपत्ति लेआउट  (municipality approved building plan or property layout),

 

  अगर संपत्ति के तौर पर कोई फ्लैट है या पूरी तरह से बनी हुए संपत्ति है तो उसके लिए आपको समापन प्रमाणपत्र (completion certificate) देना होता है या अधिभोग प्रमाणपत्र (occupancy certificate) देना होता है,

 

  अगर आपकी संपत्ति निर्माणाधीन (under construction) है तो उस केस में आपको एक प्रारंभ पत्र (commencement certificate) देना होगा,

 

  ऊपर दिए गए सभी दस्तावेजों की लोन  लेते वक़्त बैंक में ज़रूरत पड़ सकती है और इनके अलावा बैंक आपसे कोई और दस्तावेज़ की मांग करता है तो वह दस्तावेज़ आपको प्रदान करना होगा |

 

राज्य निर्धारित दस्तावेज़ (state specific requirement) जैसे – 

महाराष्ट्रा राज्य विशेष रूप से मुंबई (especially Mumbai)  - आपको नीचे लिखे दस्तावेजों की ज़रूरत होती है

     ✔     आपको बैंक के प्रारूप में निर्माता (builder) या सोसाइटी (society) से NOC (non objection certificate) फॉर्म चाहिए होता है

          पैसों की भुगतान की रसीद (payment receipts) जो निर्माता या इमारत बेचने वाले ने, खरीद ने वाले को दी होगी ,

           Index II 

          सोसाइटी द्वारा जारी शेयर प्रमाण पत्र (share certificate issued by the society),

          सोसाइटी के हस्तांतरण विलेख (conveyance deed of the society),

          बोर्ड के प्रस्ताव या मुख्तारनामा की प्रमाणित प्रतिलिपि (certified copy of board resolution or power of attorney) निर्माता के द्वारा

 

कर्नाटका राज्य विशेष रूप से बेंगलुरु 

·         खाता प्रमाणपत्र यह एक प्रमाणपत्र है, जिसके द्वारा  यह पता चलता है की संपत्ति का मालिक कौन है | कर्नाटक राज्य में तीन तरह के खाता प्रमाणपत्र होते हैं – A, B, और E प्रमाण पत्र

 

  1.A-खाता यह एक तरह का प्रमाणपत्र होता जो यह सुनिचित करता है की संपत्ति कानूनी तरीके से सभी नियमों के अंतर्गत है |

  2.B-खाता अगर कोई संपत्ति किसी उल्लंघन में है या पिछले कोई कर रुके हुए हैं (property in violation & have pending tax) तो इस तरह की संपत्ति को B खाता के अंतर्गत माना जाता है |

  3.E-खाता यह एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र है जिसको आप ऑनलाइन भी दर्ज कर सकते हो |

 

·         A और E-खाता संपत्ति स्वीकार्य है लेकिन B-खाता संपत्ति स्वीकार्य नहीं है

 

तेलंगाना राज्य (education loan in Telengana)– 

·  LRS -लैंड रेगुलेशन स्कीम (land regulation scheme)

·  BRS -बिल्डिंग रेगुलेशन स्कीम (building regulation scheme)

·  नोटरी पंजीकृत संपत्ति स्वीकार्य नहीं है |

 

दिल्ली  राज्य (education loan in delhi ) –

·  सिर्फ फ्रीहोल्ड इमारत ही स्वीकार्य  है (only freehold building acceptable)

·  GPA और लीज-होल्ड (leasehold) संपत्ति स्वीकार्य नहीं है

 

संपत्ति जो स्वीकार्य नहीं है

  • कृषि ज़मीन (agricultural land)
  • संपत्ति को नगरपालिका निगम के अंतर्गत होना चाहिए अगर नहीं है तो वह संपत्ति स्वीकार्य नहीं होगी, जैसे ज़्यादातर मामलों में ग्राम पंचायत के अंतर्गत संपत्ति को नहीं स्वीकार किया जाता 
  • खुली ज़मीन जिसकी कोई सीमा (boundary) नहीं है |

 

अगर छात्र विदेश में पढ़ना चाहते हैं तो उसके लिए कुछ और अलग से दस्तावेज़ की ज़रूरत होगी

        जिस भी विश्वविद्यालय और कोर्स में छात्र का दाखिला हुआ है उसका प्रमाण / सबूत बैंक में देना होगा

        रिकमेन्डेशन पत्र

         जितना भी कोर्स का खर्चा आएगा उसका एक पूरा अनुसूची (schedule) चाहिए,

         अगर छात्र को कोई छात्रव्रत्ति (scholarship) मिली है तो उस छात्रव्रती पत्र की एक प्रतिलिपि चाहिए,

         अगर छात्र के पास विदेशी मुद्रा परमिट है तो उस परमिट की प्रतिलिपी चाहिए

         जो लोन  ले रहा है उसके पिछले 6 महीनों की बैंक स्टेटमेंट

         गारंटर के जो-जो दस्तावेज़ बैंक मांगता है वह सब चाहिए,

 

कुछ अलग से दस्तावेज़ :

       अगर छात्र ने कहीं काम (जॉब) किया है तो कार्य अनुभव प्रमाणपत्र चाहिए , पे स्लिप ,ITR यह सब चाहिए

        अगर आपके पढ़ाई के बीच में gap रहा है तो gap प्रमाण पत्र चाहिए जिसमें यह उल्लेख होने चाहिए की छात्र ने उस gap के दौरान क्या किया | उद्धरण के लिए, बारहवीं करने के बाद किसी छात्र ने एक साल के लिए किसी भी संस्था में दाखिला नहीं लिया और एक साल तक घर पर रहकर कुछ भी करा, तो उस एक साल के समय को गैप कहेंगे और उसके लिए छात्र को गैप प्रमाण पत्र बैंक को देना होगा |

 

एहतियात बरतें (precautions) 

     छात्र लोन लेते वक़्त यह ध्यान रखें बैंक आपसे किन-किन तरह के शुल्क वसूल रहा है जैसे की प्रोसेसिंग फीस, पूर्व भुगतान और देर से भुगतान किए गई लोन की किश्त, इत्यादि |

 

     लोन लेते वक़्त अलग-अलग बैंकों के ब्याज दरों की तुलना करलें |

 

    अपने कीमती दस्तावेजों को बैंक के किसी भी कर्मचारी को व्यक्तिगत (personally) रूप से उसको भेजें (उदाहरण के लिए – email, WhatsApp या कोई और माध्यम पर) |

 

    ध्यान रखें की लोन आपकी पढ़ाई के लिए लिया जा रहा और यह आपकी ज़िम्मेदारी बनती है की आप उस लोन को चुकाएं |आप उस लोन का बोझ अपने माता-पिता या जो भी co-applicant या गारंटर आप ने लोन  लेते वक़्त दिया था उस पर यह ज़िम्मा आए, ध्यान रहे की यह नौबत आए |

 

    छोटे-मोटे कोर्स या डिग्री के लिए लोन  लेने से बचें |

 

    छात्र को शिक्षा लोन  बहुत ही सोच-समझकर लेना चाहिए अगर बहुत ही आवश्यक है और आपको अपने आप  पर पूरा भरोसा है की आने वाले समय में जब आपकी पढ़ाई पूरी हो जाएगी तब आप वह लोन  चुका-पाएँगे | आप तभी शिक्षा लोन  लीजिए क्योंकि शिक्षा लोन  एक छात्र के लिए बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी बन जाती है | लोन  लेने वाले छात्र के लिए यह एक कर्ज की तरह होता है | जो उस (छात्र) को पता होता है की आने वाले समय में उसे यह कर्ज चुकाना है | तो उसके लिए छात्र को पढ़ाई खत्म होने के बाद एक अच्छी नौकरी चाहिए तभी वह अपने लोन  का खर्चा और बाकी चीज़ों का खर्चा निकाल सकता है, तो लोन  लेने के बाद बहुत से छात्र के दिमाग पर एक मानसिक दबाव बना रहता है | क्योंकि किसी भी छात्र की अवस्था जब खराब हो जाती है तब किसी वजह से किसी छात्र की नौकरी नहीं लगती है |

 

    उत्साह में छात्र शिक्षा लोन  ले ले लेते हैं ,जिसका खामियाजा छात्र को बाद में चुकाना पड़ सकता है, तो उत्साह, जल्द-बाजी में कोई फैसला लें, अच्छे से ,धैर्य और सोच-समझकर ही शिक्षा लोन  के लिए आवेदन करें |

 

कुछ सुझाव (some tips for Education Loan) – 

    जिस भी महाविद्यालय में छात्र दाखिला ले रहा/रही है तो उस महाविद्यालय, कोर्स, और प्लेसमेंट के बारे में अच्छे से अनुसंधान (research) कर लें |जैसे की उस महाविद्यालय में प्लेसमेंट होती है या नहीं, पिछले कितने वर्षों में प्लेसमेंट हुई है या नहीं हुई है, क्योंकि मान लीजिए अगर आप ऐसे महाविद्यालय में दाखिला ले लेते हैं जहाँ प्लेसमेंट नहीं होती है तो छात्र के लिए आगे चलकर काफ़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती है क्योंकि पढ़ाई खत्म होने के बाद आपके पास नौकरी होने के संभावना बढ़ जाती है और साथ में शिक्षा लोन  भी चुकाना होता है |



   बैंकों के ब्याज दरों की ज़रूर तुलना करलें |



   आप जिस भी संस्था में दाखिला ले रहे हैं, तो वहाँ यह ज़रूर पता करलें कि उनके किसी बैंक से लोन  समझोता है या नहीं | क्योंकि बहुत से संस्थाओं (institutes) के बैंकों के साथ लोन  के लिए पहले से समझोते (loan tie-up) होते हैं, तो उसका छात्र को ब्याज दर पर फायदा मिल जाता है |



  अगर छात्र विदेश में पढ़ना चाहता है तो वह भारत में लोन  लेने के बजाए जिस भी देश में वह पढ़ना चाहता है वहाँ शिक्षा लोन  के बारे में पता करें, क्योंकि वहाँ छात्र को लोन  भारत के मुकाबले सस्ता मिल सकता है |



  अगर कोई छात्र किसी वजह से लिया हुआ शिक्षा लोन  नहीं चुका पता है या जानबूझकर नहीं चुकाता है तो उस परिस्थिति में, उधार-धारक को बैंक चूककर्ता की श्रेणी (defaulter category) में शामिल कर देगा जिसका असर सीधा-सीधा आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है | अगर किसी व्यक्ति का सिबिल स्कोर खराब होता है तो उसे किसी भी तरह का लोन  नहीं मिल पाता है | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बैंक्स आपके सिबिल स्कोर को साझा करते हैं और आप जब भी कभी बैंक से लोन  लेने जाते हो तो बैंक आपके सिबिल स्कोर की जाँच करता तो यह ध्यान रखें की लोन  लेने के बाद उसको चुकाएँ भी | तो अगर कोई व्यक्ति यह सोच रहा है की लोन  लेने के बाद उसे वह नहीं चुकाएगा तो कृपया ऐसा करें क्योंकि अगर एक बार कोई व्यक्ति बैंक द्वारा चूककर्ता की श्रेणी में जाता है तो आने वाले समय में वह व्यक्ति किसी भी तरह के लोन  के लिए आवेदन नहीं कर पाएगा क्योंकि कोई भी बैंक ऐसे व्यक्ति को लोन  नहीं देगा | और कुछ मामलों में बैंक लोन  लेने वाले व्यक्ति पर मुक़दमा भी दर्ज कर देता है



   हाँ, अगर आप लिए हुए लोन  को बिना किसी चूक के, समय पर चुका देते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर / सिबिल स्कोर काफी अच्छा हो जाता है, जिसकी मदद से आने वाले समय में आप कभी भी किसी भी तरह का लोन  लेते हो जैसे होम लोन, कार लोन, आदि तो वह आपको मिलने की संभावना बढ़ जाती है |

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQs-

  1. शिक्षा लोन  के लिए कैसे आवेदन करें ? (how to apply for education loan?)

·        सबसे पहले, या तो छात्र अपने मुताबिक जिस भी बैंक से लोन चाहते हैं वह बैंक की ब्रांच में जाकर लोन के बारे में जानकारी हासिल कर लें और लोन के लिए बैंक से ही आवेदन करदें या फिर छात्र चाहें तो ऑनलाइन भी बैंक से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आवेदन भी | जानकारी हासिल करते वक़्त छात्र बैंक से यह पता कर सकते हैं, की बैंक आपको कितने ब्याज दर पर लोन प्रदान कर रहा, क्या बैंक विदेश में पढ़ाई करने के लिए लोन प्रदान करता है या नहीं, लोन को चुकाने की अवधि कितनी होगी आदि 

 

·        छात्र को लोन देने वाले बैंक के eligibility criteria की जाँच करनी होगी जैसे, उम्र, शैक्षिक स्तर और बाकी चीजें भी  और साथ में बैंक आपसे भी वार्तालाप में कुछ प्रशन पूछ सकता है जैसे छात्र किस विश्वविद्यालय में दाखिला ले रहा है और उसमें उसने क्या कोर्स चुना है, कितने वर्ष का कोर्स होगा, छात्र की पढ़ाई में कितने पैसे लग सकते हैं उस उसके हिसाब से लोन  की राशि तय होगी, छात्र भारत में पढ़ना चाहता या विदेश में आदि सवाल हो सकते हैं |

 

·        अगर बैंक शिक्षा लोन  के लिए आपके आवेदन पत्र को स्वीकार कर लेता है तो उसके बाद बैंक आगे के प्रक्रिया को पूरा करेंगे जैसे दस्तावेजों का सत्यापन (document verification) |

 

·       शिक्षा लोन  लेते वक़्त आपको co-applicant और गारंटर की ज़रूरत पड़ सकती है | co-applicant छात्र के माता-पिता, भाई-बहन, चाचा, ताऊ या कोई और रिश्तेदार हो सकते हैं | तो छात्र इन बातों का ध्यान रखें |

 

·       आखिरी में बैंक आपके सभी दस्तावेजों, बैंक के स्टेटमेंट, क्रेडिट स्कोर, इन सबकी जाँच करेगा और फिर यह बैंक पर निर्भर करता है की वह आपके शिक्षा लोन  को मंजूरी (approve) देता है या नहीं |  



2.        लोन  देना वाला, क्या कोई प्रक्रमण शुल्क (processing fee) भी शिक्षा लोन  पर वसूलता है ?

हाँ, बहुत से बैंक प्रक्रमण शुल्क वसूलते है, यह लोन  की राशि पर निर्भर करता है



3.        लोन  की EMI देरी से जमा करने पर क्या कोई अतिरिक्त शुल्क (charge) लगता है ?

हाँ, अगर आप अपने लोन  की EMI देर से जमा करते हो तो बैंक उस पर अतिरिक्त शुल्क वसूल सकता है |



4.      अगर मेरा पहली बारी में लोन  मंजूर नहीं होता तो में क्या लोन  के लिए दुबारा आवेदन कर सकता/सकती हूँ ?

हाँ, अगर आपका पहली बारी में लोन  मंजूर नहीं होता है तो आप दुबारा लोन  के लिए आवेदन कर सकते हैं |



5.      क्या होगा अगर में लोन  लेने के बाद उसको चुकाऊँ ?

जैसे ही बैंक को यह पता लगता है की आप लोन  लेने के बाद उसको नहीं चुका रहे हैं तो बैंक शुरू में तो आपको चेतावनी वाले सूचना पत्र जारी करेंगे और अगर आप फिर भी नहीं चुकाते हैं तो तब बैंक आपको चूक-कर्ता की श्रेणी (defaulter category) में शामिल कर देंगे जिसके बाद आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह ख़राब हो जाएगा, जिसके कारण भविष्य में आप कोई और तरह के लोन  नहीं ले पाओगे | अगर कोई व्यक्ति लोन  की राशि नहीं चुकता है, इसमें बैंक का तो नुकसान होगा ही, साथ में आपका भी नुकसान होगा क्योंकि आने वाले समय में आप जब लोन के लिए आवेदन करोगे तो बैंक आपके क्रेडिट स्कोर को देखकर पहले ही मना कर देगा | तो मेरी राय में आप कभी ऐसा करें, अगर आपने लोन लिया है तो उसको चुकाएं भी |



6.      जब लोन दाता लोन देता है तो किन-किन बातों का ध्यान दिया जाता है ?

जब लोन दाता लोन प्रदान करता है तो बहुत सी बातों का ध्यान रखा जाता है, लेकिन नीचे दिए हुए कुछ मूलभूत बातें

       जिस महाविद्यालय में छात्र दाखिला ले रहा हो वहाँ उसका दाखिला पक्का हो गया हो तो उस आधार पर बैंक आपसे दाखिला प्रमाण पत्र की मांग करेगा |

      छात्र का शैक्षिक अभिलेख (academic record) देखा जाएगा |

      सह-उधारधारक (co-borrower) की नौकरी प्रोफाइल |

      किस तरह का आप collateral प्रदान कर रहे हो |

  




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