इंश्योरेंस क्या होता है पूरी जानकारी 2022 - Insurance kitne prakar ke hote hain ?

  इंश्योरेंस क्या होता है ?  इंश्योरेंस कितने प्रकार के होते हैं ?

term insurance kya hai


विभिन्न प्रकार की बीमा पॉलिसियों के बारे में विस्तृत (detailed) जानकारी 

Insurance kitne prakar ke hote hai: अपनी तथा अपनों की सुरक्षा और साथ में अपनी वस्तुओं की सुरक्षा के लिए हमें अपने जीवन में इंश्योरेंस जैसी सुविधा का लाभ उठाना चाहिए | क्योंकि हमें नहीं पता की अगले ही पल हमारे साथ क्या होने वाला है, हम कभी भी किसी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं क्योंकि समय का किसी को नहीं पता कब किस का खाराब आ जाए तो इसलिए हमें अपने जीवन में अपने मुताबिक कुछ योजनाएं ऐसी बना लेनी चाहिए ताकि अनचाही मुसीबतों से हम बच सकें और अपनों को भी बचा सकें |

 

इंश्योरेंस की मदद से हम, अचानक आए किसी बड़े वित्तीय संकट से बच सकते हैं | इंश्योरेंस कंपनियां बहुत से प्रकार की इंश्योरेंस पोलिसी प्रदान करते हैं जैसे की जीवन बीमा, हेल्थ बीमा (स्वास्थ्य बीमा), ऑटोमोबाइल इंश्योरेंस, होम इंश्योरेंस आदि इन बीमा पोलिसी की मदद से आपको आपातकालीन जैसी स्थिति में एक वित्तीय सहाय मिल जाता है | और साथ ही में इन बीमा पोलिसी का चयन करके तथा खरीदकर आप अपने संपत्ति (assets) की रक्षा/सुरक्षा भी कर सकते हैं |

 

किसी भी प्रकार की बीमा पोलिसी खरीदने से पहले आपको उनके बारे में जानना और समझना ज़रूरी है ताकि आप अपने मुताबिक और अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप उनका चयन कर सकें |

 

इंश्योरेंस क्या होता है ?

इंश्योरेंस एक क़ानूनी अनुबंध होता है किसी पॉलिसीधारक व्यक्ति और किसी इंश्योरेंस कंपनी या बीमाकर्ता के बीच | जिसमें बीमाकर्ता (बीमा प्रदान करने वाला) किसी बीमाधारक (बीमा प्राप्त करने वाला) को यह आश्वासन देता है की प्रीमियम के तौर पर दिए गए पैसों के बदले कंपनी उसके किसी भविष्य में उन नुकसानों की भरपाई का भुगतान करेगी जो-जो बीमा पोलिसी में कवर किया गया होगा |

 

मोटे तौर पर इंश्योरेंस दो प्रकार की होती है :

        लाइफ इंश्योरेंस

        जनरल इंश्योरेंस

 

 

जीवन बीमा (life insurance kya hota hai)

लाइफ इंश्योरेंस क्या है : जैसे की आप नाम से ही समझ सकते हैं की जीवन बीमा और कुछ नहीं बस आपके जीवन के लिए एक इंश्योरेंस होती है ! आप जीवन बीमा खरीदते हो और यह सुनिश्चित करते हो की आपकी मृत्यु के बाद आपके परिवार के सदस्य जो आप पर निर्भर हैं उन्हें वित्तीय तौर पर सुरक्षित कर सकें | अगर आप अपने परिवार का पालन-पोषण करते हो और आप की आय (इनकम) ही एकमात्र ज़रिया है आपके घर के खर्चों को चलाने के लिए और आपका पूरा परिवार आपकी इनकम और आप पर निर्भर है तो ऐसी स्थिति में जीवन बीमा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है | जीवन बीमा के अंतर्गत अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु पोलिसी की अवधि के दौरान हो जाती है तो बीमाधारक के परिवार को बीमा कंपनी की तरफ से वित्तीय तरीके से मुआवजा प्रदान किया जाता है |

 

जीवन बीमा के भी अनेक प्रकार होते हैं, नीचे दिए गए उनके नाम -

 

टर्म इंश्योरेंस ( Term Insurance kya hota hai ) -

        टर्म इंश्योरेंस क्या है : टर्म इंश्योरेंस एक प्रकार का इंश्योरेंस होता है जिसमें कोई व्यक्ति इसे खरीदता है तो उस व्यक्ति को इंश्योरेंस का लाभ तब ही मिलेगा जब उस व्यक्ति की इंश्योरेंस पोलिसी की अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है |

        अगर बीमाधारक की पोलिसी की अवधि के ख़त्म होने के बाद मृत्यु हो जाती है, तो बीमाकर्ता या बीमा कंपनी की तरफ से बीमाधारक के परिवार को या किसी नामांकित व्यक्ति (nominee person) को मुआवज़े के तौर पर कुछ भी नहीं दिया जाता है | 

        उदाहरण के लिए मान लेते हैं की कोई व्यक्ति टर्म प्लान खरीदना चाहता है तो वह किसी बीमा कंपनी के पास पहुंचता है | अभी उस व्यक्ति की उम्र 30 साल है और वह अगले 30 साल के लिए बीमा खरीदना चाहता है, और इस 30 वर्ष के लिए उस व्यक्ति को बीमा के प्रीमियम का भुगतान करना होगा, तो जब उस व्यक्ति की बीमा का समय पूरा होगा तो तब उस व्यक्ति की उम्र 60 वर्ष की होगी, तो इस हिसाब से बीमा की अवधि 30 वर्ष की हुई | अब, अगर उस व्यक्ति की मृत्यु बीमा की अवधि के दौरान हो जाती है तो बीमा कंपनी की तरफ से बीमर्धारक के परिवार को जितने पैसों के लिए बीमा खरीदी गई थी, उतने पैसे दे दिए जाएँगे | परंतु, अगर उस व्यक्ति की मृत्यु 60 वर्ष की उम्र तक नहीं होती है या वह बीमा की अवधि ख़त्म होने के बाद भी जीवित रह जाता है या भले ही उस व्यक्ति की मृत्यु 62, 65 वर्ष की उम्र में हो, तो ऐसी परिस्थिति में बीमा कंपनी के द्वारा उस व्यक्ति को कोई भी मुआवजा नहीं दिया जाता है | तो इस प्रकार टर्म प्लान/इंश्योरेंस काम करता है |

 

होल-लाइफ इंश्योरेंस (Whole-Life Insurance kya hota hai) -

 

        होल लाइफ इंश्योरेंस का मतलब होता है आपकी पूरी ज़िन्दगी के लिए इंश्योरेंस यानि की जबतक आप हैं  आपकी इंश्योरेंस भी है |

        होल लाइफ इंश्योरेंस पोलिसी में पॉलिसीधारक को नियमित तौर पर प्रीमियम का भुगतान करना होता है मतलब की अगर कोई व्यक्ति होल लाइफ इंश्योरेंस खरीदता है तो जब तक वह व्यक्ति जीवित रहेगा तब तक उस व्यक्ति को इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम भरते रहना होगा यानि की आपकी पोलिसी भी चलती रहेगी | और जिस दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाएगी तो उस दिन वह होल लाइफ इंश्योरेंस पोलिसी भी ख़त्म हो जाती है, और पॉलिसीधारक के परिवार या किसी नामांकित व्यक्ति को संचित राशि (accumulated amount) प्रदान कर दी जाती है |

        उदाहरण के लिए समझते हैं की, किसी व्यक्ति की उम्र होल लाइफ इंश्योरेंस खरीदते वक़्त 30 वर्ष है | तो जब तक वह व्यक्ति जीवित रहेगा तब तक वह इंश्योरेंस कंपनी को नियमित तौर पर प्रीमियम का भुगतान करता रहेगा | पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद ही, बीमाधारक के परिवार को इंश्योरेंस कंपनी के तरफ से संचित राशि दे दी जाती है, फिर चाहे उस व्यक्ति की मृत्यु 50, 60, 80, 100 किसी वर्ष की उम्र में हो |

 

एंडोमेंट इंश्योरेंस (Endowment Insurance kya hota hai) -

 

        एंडोमेंट प्लान में किसी बीमाधारक व्यक्ति को इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दोनों परिस्थितियों में, यानि की व्यक्ति के जीवित रहने पर भी और व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर भी पोलिसी की संचित राशि प्रदान कर दी जाती है|

        एंडोमेंट इंश्योरेंस एक तरह का बचत (savings) और इंश्योरेंस (insurance) का संयोजन कह जा सकता है | {savings+insurance}

        एंडोमेंट इंश्योरेंस में दो परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं :

     पहली परिस्थिति - बीमाधारक व्यक्ति की इंश्योरेंस की अवधि के दौरान मृत्यु हो जाए |

     दूसरी परिस्थिति - बीमाधारक व्यक्ति, इंश्योरेंस की अवधि पूरी होने के बाद भी जीवित रह जाता है

        एंडोमेंट इंश्योरेंस के अंतर्गत अगर किसी बीमाधारक व्यक्ति की मृत्यु, बीमा की अवधि के दौरान हो जाती है तो बीमा कंपनी की तरफ से बीमाधारक के परिवार को पोलिसी की संचित राशि (assured sum) प्रदान कर दी जाती है |

        और अगर किसी बीमाधारक व्यक्ति की मृत्यु बीमा की अवधि के दौरान नहीं होती है और वह व्यक्ति इंश्योरेंस पोलिसी पूरी होने के बाद भी जीवित रहता है तो इस पारिस्थि में भी बीमाकर्ता के द्वारा बीमाधारक को पोलिसी की संचित राशि प्रदान कर दी जाती है |

        तो इस प्रकार से हम यह कह सकते हैं की अगर कोई व्यक्ति एंडोमेंट इंश्योरेंस प्लान खरीदता है तो वह व्यक्ति इंश्योरेंस के साथ-साथ पैसों को भी जोड़ रहा है या यूँ कहें की बचत भी कर रहा है | तो इसलिए कई बार एंडोमेंट इंश्योरेंस को बचत और इंश्योरेंस का संयोजन (combination) भी कहा जाता है |

        उदाहरण के लिए समझते हैं की, किसी व्यक्ति की उम्र 30 वर्ष है और वह व्यक्ति 50 साल की उम्र होने तक एंडोमेंट प्लान खरीद लेता है मतलब की उस व्यक्ति ने एक तरह से 20 साल के लिए वह प्लान खरीद लिया और फिर 20 साल तक उस व्यक्ति को, इंश्योरेंस कंपनी को प्रीमियम का भुगतान करना होगा |  अब, मान लीजिए उस व्यक्ति की मृत्यु 40 वर्ष की उम्र में हो जाती है तो इस परिस्थिति में बीमा कंपनी द्वारा उस व्यक्ति के परिवार को मुआवजा प्रदान कर दिया जाएगा | और अगर उस व्यक्ति की मृत्यु इन 20 सालों में नहीं होती है यानि की वह 50 वर्ष की उम्र के बाद भी जीवित रह जाता है | तो इस परिस्थिति में भी बीमा कंपनी द्वारा उस व्यक्ति को मुआवजा प्रदान कर दिया जाएगा | तो दोनों परिस्थितियों में इंश्योरेंस की संचित राशि (assured amount) प्रदान कर दी जाती है |

 

यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस पोलिसी (Unit-LInked Insurance Policy or ULIP )

 

        इस प्रकार की इंश्योरेंस पोलिसी में बीमाधारक, पूरी पोलिसी की अवधि के दौरान जो प्रीमियम का भुगतान करता है तो उस भुगतान का एक हिस्सा आपकी इंश्योरेंस पोलिसी में जोड़ा जाता है तो वहीं बचा हुआ हिस्सा निवेश के लिए शेयर मार्किट, बाज़ार से जुड़ी इक्विटी (equity), मनी-मार्किट (मुद्रा बाज़ार) में कर दिया जाता है |

        जिस प्रकार हमने यह जाना की एंडोमेंट इंश्योरेंस, बचत (savings) और बीमा (insurance) का संयोजन होता है ठीक उसी समान यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस पोलिसी भी एक प्रकार से बीमा (insurance) और निवेश (investment) का संयोजन (combination) होता है | {insurance+investment}

        उदाहरण के लिए समझते हैं की, किसी व्यक्ति ने एक 20 लाख रुपए की ULIP इंश्योरेंस पोलिसी खरीदी और वह प्रीमियम के तौर पर बीमा कंपनी को हर महीने 2 हज़ार रुपए का भुगतान करता है | तो, अब इंश्योरेंस कंपनी इन 2 हज़ार रुपए को भागों में बाँट देती है जिसमें से एक हिस्सा आपकी इंश्योरेंस कवरेज में चला जाता है तो वहीं बचा हुआ हिस्सा निवेश होने के लिए शेयर मार्किट (share market), मनी-मार्किट (money market), बाज़ार से जुड़ी इक्विटी (equity) में चला जाता है | बीमा की परिपक्वता (maturity of insurance) होने पर, बीमाधारक को बीमा-कंपनी की तरफ से एक मुश्त रकम (lump sum amount) प्रदान कर दिया जाता है |

        जैसे ही बीमाधारक की पोलिसी ख़त्म होती है या पोलिसी की अवधि पूरी हो जाती है तो बीमा कंपनी उस व्यक्ति को बीमा का पैसे दे देती है मतलब की जितने की पालिसी खरीदी गई थी उतना अमाउंट प्रदान कर दिया जाता है और साथ ही में निवेश से जो भी मुनाफा (profit) हुआ होगा वह भी बीमाधारक को प्रदान कर दिया जाता है |

        और अगर बीमाधारक की इंश्योरेंस पोलिसी की अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है तो, बीमाकर्ता के द्वारा बीमाधारक के परिवार को संचित राशि (accumulated amount) प्रदान कर दी जाती है |

 

मनी बेक इंश्योरेंस (money back insurance kya hota hai) -

 

        मनी बेक पोलिसी एक प्रकार की बीमा होती है जिसमें बीमाकर्ता द्वारा बीमाधारक को एक लगातार अंतराल पर एक विशेष राशि/रकम का भुगतान करना होता है | इस तरह की पोलिसी को सर्वाइवल बेनिफिट (survival benefit) कहते हैं |

        पोलिसी के पूरे जाने पर या पोलिसी की अवधि समाप्त होने के बाद बीमाधारक को परिपक्वता रकम के  रूप में शेष रकम प्रदान कर दी जाती है |

        अगर बीमाधारक की मृत्यु पोलिसी की अवधि के दौरान हो जाती है तो ऐसी परिस्थिति में बीमाधारक के परिवार को बीमा का अशुअर्ड सम (assured sum) प्रदान किया जाता है | 

        उदाहरण के लिए समझते हैं की, किसी व्यक्ति ने 30 वर्ष की उम्र में 10 लाख रुपए की मनी बेक पोलिसी खरीदी जिसकी अवधि 20 वर्षों के लिए है | तो अब, बीमाकर्ता एक लगातार अंतराल पर बीमाधारक को पोलिसी का कुछ प्रतिशत प्रदान करता रहेगा | जैसे की 35 वर्ष की उम्र में बीमाधारक को 2 लाख रुपए प्रदान कर दिए जाएँगे, और फिर 5 साल बाद यानि की 40 वर्ष की उम्र में बीमाधारक को दुबारा 2 लाख रुपए प्रदान कर दिए जाएँगे और फिर जब आखिरी में बीमा पोलिसी की अवधि पूरी हो जाएगी तब बीमाधारक को बाकि का बचा हुआ अमाउंट और साथ में बोनस अमाउंट प्रदान कर दिया जाता है | तो इस प्रकार मनी बेक इंश्योरेंस काम करता है और इसलिए इस इंश्योरेंस को सर्वाइवल बेनिफिट कहते हैं | 

 

    

   

        

 

 

 


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